पन्नो मे छुपी होती है मेरी खुशियाँ, ग़म और हमसफर 'किताबें'|
जी हाँ किताबें जिन्हे बे-इंतेहा मोहब्बत करती हूँ| या यूँ कहिए की मेरा सच्चा प्यार तो किताबों से ही है| शायद इसलिए आज तक किसी और को दिल मे जगह नही दे पाई और ना ही ज़िंदगी मे|
एपिसोड 1
"मेरे हमदम के साथ वो हसीन रात"
हवाओं का काफिला और कॉफी का साथ किसी तरह से मुझे किताब मे बाँधे हुए थे| मैं बहुत बोर रही थी| करीब आधे घंटे बाद मैने हवाओं को अपने बाल सहलाते हुए महसूस किया| अब मेरी आँखे बोझिल होती जा रही थी| अपने अपनी आँखे बंद कर ली| हवाओ ने मेरे कानों मे कुछ कहा, शायद पूछा, 'क्या तुम मेरा इंतज़ार कर रही थी?' एक पल को मैं चौंक गयी और अगले ही पल मेरी आँखों के सामने भयावह दृश्य था| मेरी किताब के दो दिन पन्ने फट चुके थे, बारिश बिना पूछे घर के अंदर दस्तक दे रही थी और तेज़ी से अपना रास्ता तलाश रही थी| मैं गुस्से मे उठी, खिड़की को बंद किया और पानी को रोकने का प्रयास करने लगी |आज पहली बार मुझे पानी से इतनी चिढ़ हुई थी उसने मेरे प्यार का जो हाल किया था उसके लिए मैं उसे ज़िंदगी भर माफ़ नही करती तभी मुझे याद आया सारी ग़लती तो उसकी है|
कहानी 'खोये पन्ने' जारी है...
आपकी राय का इंतज़ार रहेगा|
कहानी 'खोये पन्ने' जारी है...
आपकी राय का इंतज़ार रहेगा|
अमित की कलम से


It has beautiful imagery. ��A very flowing one.
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