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रविवार, नवंबर 25

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सर्द हवाओं ने दस्तक दे दी है, गर्म कपड़े , रजाई, कम्बल सब निकल गए हैं | तो कम्बल में चाय की चुस्कियों के साथ किताबें हो तो क्या बात है तो फटाफट चेकलिस्ट कीजिये Best Books To Read in Hindi Decemeber 2018 :

Best Books To Read in Hindi December 2018

1. Best Books To Read लिस्ट में पहला नाम आता है: दिव्य प्रकाश दूबे जी की किताबों का | मसाला चाय, मुसाफिर कैफ़े से नयी वाली हिंदी (#naiwalihindi) को युवाओं से जोड़ने वाले दिव्य स्टोरीबाज़ी के लिए भी जाने जाते हैं| मसाला चाय का हाल में अंग्रेजी संस्करण भी आया है और अमेज़न पर खूब बिक रहा है | मुसाफिर कैफ़े जहा आपको उत्तराखंड की खूबसूरती से बांधे रखेगा तो मसाला चाय आपकी चुस्कियों का स्वाद और भी मज़ेदार कर देगी|  


2. सत्य व्यास: नयी वाली हिंदी के सूत्रधार में सत्य व्यास का भी नाम आता है बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, यानी बीएचयू से लॉ की पढ़ाई करने और वहां के भगवानदास होस्टल के किस्से को बनारस टाकीज़ में पिरोने वाले लेखक हिंदी पढ़ने वालों को नया फ़्लेवर देने में कामयाब रहे | इनकी दिल्ली दरबार भी लोगो को खूब पसंद आयी|

3. Best Books To Read लिस्ट में  अगला नाम है निखिल सचान का! नमक स्वादानुसार, ज़िंदगी आइस पाइस और यू पी 65 से अपनी अलग पहचान बनाने वाले निखिल बहुत कम समय में हिंदी लेखकों की सूची में आगे बढ़ रहे हैं |
4 . नीलेश मिश्रा: बात बे बात अपनी बात कहता है... रेडियो पर ये आवाज़ सुनते ही, घर के सारे काम बंद कर कहानी में खो जाते थे याद शहर की कहानियों का कलेक्शन इस ठण्ड में आपको सुखद एहसास दिलाएगी | याद शहर vol 1 & 2 को जरूर पढ़िए|

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5. संदीप देव की कहानी कम्यूनिस्टों की  Best Books To Read की लिस्ट में इस किताब को रखना इसलिए भी जरुरी है क्योकि ये जानना जरुरी है लेफ्ट और राइट क्या है? दोनों विचारधारा में इतनी असमानताएं क्यों है?

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 कुछ और किताबें भी हैं जो आप चुन सकते हैं: ज़िंदगी ५०-50, इश्कियापा, नीला स्कार्फ,

अगर आपको मेरी Best Books To Read लिस्ट पसंद आयी तो दोस्तों के बीच शेयर कीजिये और हमें बताइये आपकी विश लिस्ट में क्या है?


सोमवार, मार्च 12

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थोडा लेट हूँ, लेकिन लिखने का कोई सही वक़्त नहीं होता है| पिछले दिनों 8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया |  सैकड़ों कार्यक्रम हुए, कुछ एक महिलाएं सम्मानित भी हुयी | कुछ ने अपने मुश्किल दौर को लोगों के बीच रखा | तमाम न्यूज़ चैनल्स महिलाओं के स्वाभिमान की गाथा सुना रही थी, अख़बार महिलाओं के तरक्की की कहानियां बुने हुए थी | मुझे भी फख्र हो रहा था! लेकिन क्यों?

amit pandey letter


माँ को रसोईघर घर में काम करते हुए देख कर या फिर बहन को अपनी खुशियों(सपना) का गला घोट मेरे लिए घर के दूसरे कामों को जल्दी खत्म करते हुए देखकर? पत्नी का 2 किमी मंडी सिर्फ इसलिए जाना की कम से कम 50 रुपये बच जायेंगे और फिर मुझे कुछ ना बताना जानकर?  या फिर दादी का अपने चश्मे का कांच इसलिए ना बदलवाना कि मुझे इस बार जन्म दिन पर महँगी घडी देने की मज़बूरी पर गौर करके?

सोमवार, मार्च 5

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sridevi
source

“जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में होती है |”
“दुनिया एक रंग मंच है, हम एस रंग मंच के कठपुतली है”
“तुम क्या लेकर आये थे, क्या लेकर जाओगे?”
इस तरह के डायलोग हमने बहुत देखे और सुने है | कलाकार अपनी कला से फिल्मों में हमे हँसाता है, हमें रुलाता है हाँ कभी कभी कुछ सन्देश दे जाता है | लेकिन उनकी असल जिंदगी से हमें कोई सरोकार नहीं होता है |
बीते दिनों में मीडिया और टेक्नोलॉजी ने उनकी व्यक्तिगत जिंदगी को भी तार तार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है| चाहे वो किसी अभिनेत्री को हुआ जुकाम हो या फिर चाय पर दोस्तों के संग बैठे हों|
हद तो तब हो गयी जब बेहतरीन कलाकारों में शुमार “श्री देवी” की मौत के बाद मीडिया द्वारा तमाम तरह के दलीलें देना| हो ना हो मीडिया ने उनकी दिवंगत आत्मा को भी झकझोर दिया होगा | आश्चर्य होता है, कि टीआरपी की रेस में तमाम मीडिया मानवता का खून कर रही है| इस कृत्य से ना केवल शोकाकुल परिवार आहत हुआ बल्कि हर वो शख्स जो “श्री देवी” को चाहता था, अपने आंसू पोछते हुए मीडिया की बेहूदगी पर गुस्सा जाहिर कर रहा था | अंततः बोनी कपूर को एक ख़त लिखना ही पड़ा|





हालाँकि उन्होंने खुले शब्दों में मीडिया को कुछ नहीं कहाँ क्योकि जब कोई बेशर्म हो जाये तो अपनी इज्जत खुद ही बचा लेनी चाहिए लेकिन एक इशारा जरुर किया |
“श्री देवी” बेशक बहुत ही खास थी, मैंने बचपन से उनकी बहुत सारी फ़िल्में देखी हैं, “नागिन”, “जुदाई”, "मि इंडिया", "रूप की रानी चोरों का राजा" और भी बहुत फ़िल्में मुझे अच्छी लगी| लेकिन उनकी मौत कुछ सवाल भी छोड़ गयी


क्या मीडिया यूँ ही किसी की इज्जत तार तार करता रहेगा?क्या पद्म श्री विजेताओ को गौरवमयी सम्मान (तिरंगा) देना उचित है ?क्या राज्य सरकार किसी को भी राजकीय सम्मान दे सकती है?



हम सभी श्रीदेवी को बेंतेहा प्यार करते थे लेकिन तिरंगा में लिपटे देख दुःख हुआ | उन हजारों सैनिको की तरफ से बस एक दरख्वास्त है, कम से कम तिरंगे को राजनीती के लिए इस्तेमाल मत कीजिये |
श्री देवी एक बेहतरीन अदाकारा थी लेकिन उनकी अदाकारी उनका पेशा था |
इस पोस्ट से किसी की भावना आहत हुयी हो तो माफ़ी चाहता हूँ, श्रीदेवी के परिवार के प्रति मेरी पूरी संवेदनाएं है |
जय हिंद

शुक्रवार, नवंबर 3

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wamik jaunpur shayar kajgaon ki shanसैय्यद अहमद मुज्तबा “वामिक जौनपुरी" 23 अक्टूबर 1909 को एतिहासिक शहर जौनपुर से लगभग आठ किमी दूर कजगांव में स्थित लाल कोठी में एक बड़े जमीदार घराने में एक आला अफसर के बेटे के रूप में पैदा हुए | माँ का नाम था अश्र्फुन्निसा बीवी और पिताजी का नाम था खान बहादुर सैय्यद मोहम्मद मुस्तफा, जिन्होंने फैजाबाद की दीप्ती कलेक्टरी की नौकरी से शुरू करके बरेली की कमिश्नरी से अवकाश पाया| पांच साल की उम्र में शिक्षा-दीक्षा के लिए अपने नाना मीर रियाउद्दीन साहब की अतालिकी में दे दिए गए|

बुधवार, नवंबर 1

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कहते हैं इश्क़ में, जलाते है अंगारें,
एक फूंक नाकाफी, दूर हैं सितारे|